मानसून पर अल नीनो का साया गहराया, क्या इस बार बारिश होगी कम और बढ़ेगा सूखे का संकट, जानें ताज़ा अनुमान Monsoon 2026 Forecast

By Meera Sharma

Published On:

Monsoon 2026 Forecast

Monsoon 2026 Forecast: भारत में जब भी मानसून की चर्चा शुरू होती है, एक शब्द बार-बार सुनाई देता है—अल नीनो। खेती-किसानी पर निर्भर इस देश के लिए मानसून केवल मौसम नहीं, बल्कि जीवनरेखा है। खेतों में बोई जाने वाली खरीफ फसलें, गांवों की अर्थव्यवस्था और करोड़ों किसानों की उम्मीदें इसी बारिश पर टिकी होती हैं। ऐसे में यदि अल नीनो जैसी समुद्री घटना सक्रिय होने लगे, तो स्वाभाविक है कि चिंता बढ़ जाती है।

+856
अभी Join करें WhatsApp Group फ़्री ग्रुप में ज्वाइन करें!!
Join Now →

अल नीनो क्या है और इसका भारत पर प्रभाव

अल नीनो दरअसल प्रशांत महासागर के मध्य और पूर्वी हिस्से में समुद्र की सतह के तापमान में असामान्य वृद्धि की स्थिति है। जब समुद्र का पानी सामान्य से अधिक गर्म हो जाता है, तो वैश्विक स्तर पर मौसम चक्र प्रभावित होता है। भारत जैसे मानसून-आधारित देश में इसका असर सीधे बारिश पर पड़ता है। आमतौर पर अल नीनो की स्थिति में दक्षिण-पश्चिम मानसून कमजोर पड़ सकता है, जिससे औसत से कम वर्षा दर्ज होती है। इसके उलट यदि ला नीना सक्रिय हो, तो समुद्री तापमान सामान्य से ठंडा रहता है और भारत में प्रायः अच्छी बारिश देखने को मिलती है। इसीलिए वैज्ञानिक और मौसम विशेषज्ञ हर वर्ष फरवरी-मार्च से ही समुद्री तापमान के रुझानों पर नजर रखना शुरू कर देते हैं। इस समय संकेत मिल रहे हैं कि समुद्र की सतह का तापमान धीरे-धीरे बढ़ रहा है, जो आगे चलकर अल नीनो के रूप में विकसित हो सकता है।

वर्तमान स्थिति: एंसो न्यूट्रल से अल नीनो की ओर?

मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार फिलहाल स्थिति ‘एंसो न्यूट्रल’ की ओर बढ़ती दिखाई दे रही है। एंसो यानी एल नीनो-सदर्न ऑस्सिलेशन, जो समुद्री तापमान और वायुमंडलीय दबाव से जुड़ा एक चक्र है। न्यूट्रल स्थिति का अर्थ है कि न तो अल नीनो और न ही ला नीना प्रभावी है। यह अवस्था यदि लंबे समय तक बनी रहती है, तो मानसून सामान्य रहने की संभावना रहती है। हालांकि कई अंतरराष्ट्रीय मौसम मॉडलों का विश्लेषण बताता है कि आने वाले महीनों में अल नीनो के विकसित होने की आशंका 40 से 50 प्रतिशत तक हो सकती है, खासकर जून, जुलाई और अगस्त के दौरान। ये तीनों महीने मानसून के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। यदि अगस्त और सितंबर तक समुद्री तापमान में और वृद्धि होती है, तो अल नीनो की संभावना 60 प्रतिशत तक पहुंच सकती है। यही वह बिंदु है जहां से चिंता गहराने लगती है।

Also Read:
₹500 के नोटों को लेकर RBI का बड़ा ऐलान, आम जनता पर क्या होगा असर? पूरी जानकारी यहां पढ़ें 500 Rupee Note New Rules

क्या हिंद महासागर द्विध्रुव संभाल सकता है स्थिति?

यहां एक और कारक अहम भूमिका निभाता है—हिंद महासागर द्विध्रुव यानी इंडियन ओशन डाइपोल (IOD)। जब हिंद महासागर के पश्चिमी और पूर्वी हिस्सों के तापमान में अंतर पैदा होता है, तो इसका असर मानसून पर पड़ता है। यदि IOD सकारात्मक अवस्था में रहता है, तो वह अल नीनो के नकारात्मक प्रभाव को कुछ हद तक संतुलित कर सकता है। कई बार ऐसा देखा गया है कि अल नीनो सक्रिय होने के बावजूद, सकारात्मक IOD के कारण भारत में सामान्य या उससे बेहतर बारिश हुई है। इसलिए केवल अल नीनो की आशंका से ही अंतिम निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी। अंतिम तस्वीर कई वैश्विक और क्षेत्रीय कारकों के संयुक्त प्रभाव से तय होगी।

वर्ष की शुरुआत में बारिश में भारी कमी

इस वर्ष की शुरुआत के आंकड़े भी चिंता बढ़ाने वाले हैं। 1 जनवरी से 19 फरवरी के बीच देशभर में औसत वर्षा में लगभग 57 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है। मध्य भारत, गुजरात, महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में बारिश लगभग न के बराबर रही है, जहां 80 से 100 प्रतिशत तक की कमी देखी गई है। यह स्थिति रबी फसलों और जल भंडारण के लिहाज से चुनौतीपूर्ण है। उत्तर भारत के कुछ हिस्सों, जैसे पंजाब और हरियाणा, में स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर रही है, लेकिन देश के बड़े हिस्से में शुष्क परिस्थितियां बनी हुई हैं। कम बारिश का असर केवल फसलों पर ही नहीं, बल्कि भूजल स्तर और जलाशयों पर भी पड़ता है, जो आगे चलकर सिंचाई और पेयजल आपूर्ति को प्रभावित कर सकता है।

बढ़ता तापमान और समय से पहले गर्मी

बारिश की कमी के साथ-साथ तापमान में भी असामान्य बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। दिल्ली, राजस्थान और उत्तर प्रदेश के कई इलाकों में अधिकतम तापमान सामान्य से ऊपर पहुंच चुका है। फरवरी के अंतिम सप्ताह में ही गर्मी का अहसास होने लगा है, जो आने वाले महीनों के लिए चेतावनी जैसा है। यदि मार्च और अप्रैल में तापमान सामान्य से अधिक रहता है, तो मिट्टी की नमी तेजी से घट सकती है। इससे खरीफ सीजन की बुवाई पर भी असर पड़ सकता है। अधिक गर्मी का असर गेहूं जैसी रबी फसलों की पैदावार पर भी पड़ता है, जिससे उत्पादन में गिरावट की आशंका बढ़ जाती है।

Also Read:
India Post GDS Result 2026 इंडिया पोस्ट GDS 2026 की पहली मेरिट लिस्ट जारी, जानें कटऑफ मार्क्स, डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन डेट और रिजल्ट चेक करने का पूरा तरीका India Post GDS Result 2026

आने वाले दिनों का पूर्वानुमान

अल्पकालिक पूर्वानुमान के अनुसार 22 से 25 फरवरी के बीच दक्षिण भारत के कुछ हिस्सों—जैसे कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना—में बादल छाने और हल्की बारिश की संभावना है। मध्य भारत के महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ में भी कुछ स्थानों पर बूंदाबांदी हो सकती है। हालांकि यह बारिश व्यापक नहीं होगी और सूखे की स्थिति को पूरी तरह संतुलित करने के लिए पर्याप्त नहीं मानी जा रही। उत्तर भारत में फिलहाल मौसम शुष्क बने रहने का अनुमान है। फरवरी के अंत या मार्च की शुरुआत में एक पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय हो सकता है, जिससे पहाड़ी राज्यों में बारिश या बर्फबारी की संभावना बनेगी। इसका सीमित प्रभाव मैदानी इलाकों तक पहुंच सकता है, लेकिन बड़े स्तर पर राहत की उम्मीद कम है।

किसानों के लिए सावधानी और तैयारी जरूरी

बदलते मौसम के इन संकेतों के बीच किसानों के लिए सजग रहना बेहद जरूरी है। यदि मानसून कमजोर रहने की आशंका है, तो जल संरक्षण, सूखा-सहिष्णु बीजों का चयन और फसल विविधीकरण जैसी रणनीतियां अपनाना समझदारी होगी। कृषि विशेषज्ञ भी सलाह दे रहे हैं कि मौसम पूर्वानुमान पर लगातार नजर रखी जाए और खेती की योजना उसी अनुसार बनाई जाए। सरकार और संबंधित एजेंसियों के लिए भी यह समय तैयारी का है। जल प्रबंधन, सिंचाई परियोजनाओं की समीक्षा और किसानों को समय पर सलाह उपलब्ध कराना बेहद आवश्यक होगा। मानसून का खेल प्रकृति के हाथ में है, लेकिन समझदारी और तैयारी से उसके प्रभाव को काफी हद तक कम किया जा सकता है। अंततः यह कहना उचित होगा कि अभी तस्वीर पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। अल नीनो की आहट जरूर सुनाई दे रही है, लेकिन अंतिम परिणाम कई कारकों पर निर्भर करेगा। आने वाले कुछ महीनों में समुद्री तापमान और वैश्विक मौसम पैटर्न की दिशा तय करेगी कि इस साल खेतों में हरियाली लहराएगी या सूखे की चिंता गहराएगी। किसानों की निगाहें अब आसमान के साथ-साथ समुद्र के तापमान पर भी टिकी हैं।

Also Read:
Tatkal Ticket 2026 Tatkal Ticket का बड़ा बदलाव, अब अचानक यात्रा भी होगी आसान, तुरंत कन्फर्म सीट पाने के नए नियम जानें Tatkal Ticket 2026

Meera Sharma

Meera Sharma is a talented writer and editor at a top news portal, shining with her concise takes on government schemes, news, tech, and automobiles. Her engaging style and sharp insights make her a beloved voice in journalism.

Related Posts

Leave a Comment